श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 34: सीताजी का हनुमान् जी के प्रति संदेह और उसका समाधान तथा हनुमान् जी के द्वारा श्रीरामचन्द्रजी के गुणों का गान  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  5.34.38 
मध्ये वानरकोटीनां सुग्रीवं चामितौजसम्।
अहं सुग्रीवसचिवो हनूमान् नाम वानर:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
तुम करोड़ों वानरों से घिरे हुए अत्यंत तेजस्वी सुग्रीव को भी देखोगे। मैं हनुमान नामक वानर हूँ, सुग्रीव का मंत्री।
 
‘You will also see the extremely brilliant Sugreeva surrounded by millions of monkeys. I am a monkey named Hanuman, the minister of Sugreeva.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)