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ramayan 5.34.33-34h: मैं उनका दूत बनकर आपके पास आया हूँ। प्रभु श्री राम आपके वियोग से उत्पन्न दुःख से पीड़ित हैं। उन्होंने आपको अपना कुशल-क्षेम बताया है और आपका कुशल-क्षेम भी पूछा है॥33 1/2॥   |   ramayan सर्ग 5.34: सीताजी का हनुमान् जी के प्रति संदेह और उसका समाधान तथा हनुमान् जी के द्वारा श्रीरामचन्द्रजी के गुणों का गान   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 34: सीताजी का हनुमान् जी के प्रति संदेह और उसका समाधान तथा हनुमान् जी के द्वारा श्रीरामचन्द्रजी के गुणों का गान  »  श्लोक 33-34h
 
 
श्लोक  5.34.33-34h 
तेनाहं प्रेषितो दूतस्त्वत्सकाशमिहागत:॥ ३३॥
त्वद्वियोगेन दु:खार्त: स त्वां कौशलमब्रवीत्।
 
 
अनुवाद
मैं उनका दूत बनकर आपके पास आया हूँ। प्रभु श्री राम आपके वियोग से उत्पन्न दुःख से पीड़ित हैं। उन्होंने आपको अपना कुशल-क्षेम बताया है और आपका कुशल-क्षेम भी पूछा है॥33 1/2॥
 
I have come to you as his messenger. Lord Shri Ram is suffering from the sorrow caused by your separation. He has told you about his well-being and has also asked about your well-being.॥ 33 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)