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ramayan 5.34.32-33h: पराक्रमी श्री रामचन्द्रजी क्रोध में प्रज्वलित अग्नि के समान उज्ज्वल बाणों द्वारा युद्ध में शीघ्र ही रावण को मार डालेंगे॥32 1/2॥   |   ramayan सर्ग 5.34: सीताजी का हनुमान् जी के प्रति संदेह और उसका समाधान तथा हनुमान् जी के द्वारा श्रीरामचन्द्रजी के गुणों का गान   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 34: सीताजी का हनुमान् जी के प्रति संदेह और उसका समाधान तथा हनुमान् जी के द्वारा श्रीरामचन्द्रजी के गुणों का गान  »  श्लोक 32-33h
 
 
श्लोक  5.34.32-33h 
अचिराद् रावणं संख्ये यो वधिष्यति वीर्यवान्॥ ३२॥
क्रोधप्रमुक्तैरिषुभिर्ज्वलद्भिरिव पावकै:।
 
 
अनुवाद
पराक्रमी श्री रामचन्द्रजी क्रोध में प्रज्वलित अग्नि के समान उज्ज्वल बाणों द्वारा युद्ध में शीघ्र ही रावण को मार डालेंगे॥32 1/2॥
 
The mighty Shri Ramchandraji will soon kill Ravana in the battle with arrows as bright as blazing fire fired in anger. 32 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)