Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.34.31-32h: 'उस महात्मा की भुजाओं के आश्रय में यह सारा जगत स्थित है। जिसने मृगरूपी रात्रिचर जीव के द्वारा श्री रघुनाथजी को आश्रम से दूर भेजकर निर्जन आश्रम में पहुँचकर तुम्हारा अपहरण किया है, उसे जो पाप भोगना पड़ेगा, उसका फल तुम अपनी आँखों से देखोगे।॥31 1/2॥ | ramayan सर्ग 5.34: सीताजी का हनुमान् जी के प्रति संदेह और उसका समाधान तथा हनुमान् जी के द्वारा श्रीरामचन्द्रजी के गुणों का गान । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'उस महात्मा की भुजाओं के आश्रय में यह सारा जगत स्थित है। जिसने मृगरूपी रात्रिचर जीव के द्वारा श्री रघुनाथजी को आश्रम से दूर भेजकर निर्जन आश्रम में पहुँचकर तुम्हारा अपहरण किया है, उसे जो पाप भोगना पड़ेगा, उसका फल तुम अपनी आँखों से देखोगे।॥31 1/2॥
‘The entire world rests under the shelter of the arms of that great soul. The one who kidnapped you after reaching the deserted ashram by sending Sri Raghunathji away from the ashram through a deer-like night creature, you will see with your own eyes the consequences of that sin which he will have to face.॥ 31 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥