श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 34: सीताजी का हनुमान् जी के प्रति संदेह और उसका समाधान तथा हनुमान् जी के द्वारा श्रीरामचन्द्रजी के गुणों का गान  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  5.34.28 
आदित्य इव तेजस्वी लोककान्त: शशी यथा।
राजा सर्वस्य लोकस्य देवो वैश्रवणो यथा॥ २८॥
 
 
अनुवाद
भगवान् राम सूर्य के समान तेजस्वी हैं, चन्द्रमा के समान प्रजा के प्रिय हैं और भगवान् कुबेर के समान सम्पूर्ण जगत के राजा हैं॥ 28॥
 
‘Lord Rama is as radiant as the Sun, as beloved of the people as the Moon and, like Lord Kubera, is the King of the entire universe.॥ 28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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