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श्लोक  5.34.20 
अहो स्वप्नस्य सुखता याहमेव चिराहृता।
प्रेषितं नाम पश्यामि राघवेण वनौकसम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
ओह! यह स्वप्न कितना सुखद है? जिसे बहुत दिनों तक अपहरण करके यहाँ लाया गया था, आज मैं भगवान राम द्वारा भेजे गए वानर दूत को देख रहा हूँ।
 
Oh! How pleasant is this dream? The one who was brought here after being kidnapped for a long time, today I am seeing the monkey messenger sent by Lord Rama.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)