Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 5.34.11: तब निर्दोष अंगों वाली सीता अशोक वृक्ष की शाखा छोड़कर शोक से व्याकुल होकर भूमि पर बैठ गईं।   |   ramayan सर्ग 5.34: सीताजी का हनुमान् जी के प्रति संदेह और उसका समाधान तथा हनुमान् जी के द्वारा श्रीरामचन्द्रजी के गुणों का गान   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 34: सीताजी का हनुमान् जी के प्रति संदेह और उसका समाधान तथा हनुमान् जी के द्वारा श्रीरामचन्द्रजी के गुणों का गान  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  5.34.11 
तामशोकस्य शाखां तु विमुक्त्वा शोककर्शिता।
तस्यामेवानवद्याङ्गी धरण्यां समुपाविशत्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
तब निर्दोष अंगों वाली सीता अशोक वृक्ष की शाखा छोड़कर शोक से व्याकुल होकर भूमि पर बैठ गईं।
 
Then Sita with flawless limbs left the branch of the Ashoka tree and sat down on the ground, overcome with grief.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)