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श्लोक 5.33.7  |
किं नु चन्द्रमसा हीना पतिता विबुधालयात्।
रोहिणी ज्योतिषां श्रेष्ठा श्रेष्ठा सर्वगुणाधिका॥ ७॥ |
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| अनुवाद |
| क्या आप नक्षत्रों में श्रेष्ठ और परम पुण्यशाली रोहिणी देवी हैं, जो चन्द्रमा से अलग होकर स्वर्ग से गिर पड़ीं?॥7॥ |
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| ‘Are you Rohini Devi, the best of the stars and the most virtuous, who fell from the heaven after being separated from the Moon?॥ 7॥ |
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