श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 33: सीताजी का हनुमान जी को अपना परिचय देते हुए अपने वनगमन और अपहरण का वृत्तान्त बताना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.33.7 
किं नु चन्द्रमसा हीना पतिता विबुधालयात्।
रोहिणी ज्योतिषां श्रेष्ठा श्रेष्ठा सर्वगुणाधिका॥ ७॥
 
 
अनुवाद
क्या आप नक्षत्रों में श्रेष्ठ और परम पुण्यशाली रोहिणी देवी हैं, जो चन्द्रमा से अलग होकर स्वर्ग से गिर पड़ीं?॥7॥
 
‘Are you Rohini Devi, the best of the stars and the most virtuous, who fell from the heaven after being separated from the Moon?॥ 7॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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