श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 33: सीताजी का हनुमान जी को अपना परिचय देते हुए अपने वनगमन और अपहरण का वृत्तान्त बताना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  5.33.25 
दद्यान्न प्रतिगृह्णीयात् सत्यं ब्रूयान्न चानृतम्।
अपि जीवितहेतोर्हि राम: सत्यपराक्रम:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
'सत्य के पुजारी भगवान श्री राम केवल देते हैं, लेते नहीं। वे सदैव सत्य बोलते हैं; प्राण बचाने के लिए भी वे कभी झूठ नहीं बोल सकते। ॥2 5॥
 
‘Lord Shri Ram, the one who is the champion of truth, only gives, he does not take. He always speaks the truth; he can never lie even to save his life. ॥2 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)