श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 33: सीताजी का हनुमान जी को अपना परिचय देते हुए अपने वनगमन और अपहरण का वृत्तान्त बताना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  5.33.22 
स राजा सत्यवाग् देव्या वरदानमनुस्मरन्।
मुमोह वचनं श्रुत्वा कैकेय्या: क्रूरमप्रियम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
महाराज दशरथ बड़े सत्यवादी थे। उन्होंने कैकेयी देवी से दो वर मांगे थे। उस वर का स्मरण करके तथा कैकेयी के कठोर एवं अप्रिय वचन सुनकर वे मूर्छित हो गए॥ 22॥
 
‘Maharaj Dasharath was very truthful. He had asked Kaikeyi Devi to grant him two boons. Remembering the boon and listening to Kaikeyi's cruel and unpleasant words, he fell unconscious.॥ 22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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