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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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सर्ग 33: सीताजी का हनुमान जी को अपना परिचय देते हुए अपने वनगमन और अपहरण का वृत्तान्त बताना
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श्लोक 20
श्लोक
5.33.20
न पिबेयं न खादेयं प्रत्यहं मम भोजनम्।
एष मे जीवितस्यान्तो रामो यद्यभिषिच्यते॥ २०॥
अनुवाद
अब मैं न जल पीऊँगा, न नित्य भोजन करूँगा। यदि श्री राम का राज्याभिषेक हो गया, तो यही मेरे जीवन का अंत होगा।
‘Now I will neither drink water nor eat the daily meal. If Shri Ram is crowned, then this will be the end of my life.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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