श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 33: सीताजी का हनुमान जी को अपना परिचय देते हुए अपने वनगमन और अपहरण का वृत्तान्त बताना  »  श्लोक 15-16
 
 
श्लोक  5.33.15-16 
पृथिव्यां राजसिंहानां मुख्यस्य विदितात्मन:।
स्नुषा दशरथस्याहं शत्रुसैन्यप्रणाशिन:॥ १५॥
दुहिता जनकस्याहं वैदेहस्य महात्मन:।
सीतेति नाम्ना चोक्ताहं भार्या रामस्य धीमत:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
कपिवर! मैं संसार के श्रेष्ठ राजाओं में श्रेष्ठ, सर्वत्र विख्यात और शत्रु सेना का संहार करने में समर्थ राजा दशरथ की पुत्रवधू हूँ, विदेहराज महात्मा जनक की पुत्री हूँ तथा परम बुद्धिमान भगवान श्री राम की धर्मपत्नी हूँ। मेरा नाम सीता है।
 
Kapivar! I am the daughter-in-law of King Dasharatha, who was the best among the best kings of the world, who was famous everywhere and who was capable of destroying the enemy's army, I am the daughter of Videharaja Mahatma Janak and I am the religious wife of the most intelligent Lord Shri Ram. My name is Sita.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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