श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 33: सीताजी का हनुमान जी को अपना परिचय देते हुए अपने वनगमन और अपहरण का वृत्तान्त बताना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  5.33.14 
सा तस्य वचनं श्रुत्वा रामकीर्तनहर्षिता।
उवाच वाक्यं वैदेही हनूमन्तं द्रुमाश्रितम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
हनुमानजी के वचन सुनकर विदेहनन्दिनी सीता श्री रामचन्द्रजी का स्मरण करके अत्यन्त प्रसन्न हुईं; अतः वे वृक्ष के सहारे खड़े हुए पवनकुमार (हनुमानजी) से बोलीं॥
 
On hearing Hanuman's words, Videhanandini Sita was very pleased with the mention of Shri Ramchandra; hence she spoke to Pawankumar (Lord Hanuman) standing with the support of the tree.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)