श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 33: सीताजी का हनुमान जी को अपना परिचय देते हुए अपने वनगमन और अपहरण का वृत्तान्त बताना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  5.33.13 
यथा हि तव वै दैन्यं रूपं चाप्यतिमानुषम्।
तपसा चान्वितो वेषस्त्वं राममहिषी ध्रुवम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
‘जिस प्रकार तुम शोक के कारण दीन हो गई हो, जिस प्रकार तुम्हारा रूप है, तुम्हारा अलौकिक रूप है और जिस प्रकार तुमने तपस्वियों का वेश धारण किया है, उससे तुम निश्चय ही भगवान राम की रानी जान पड़ती हो॥13॥
 
‘The way you have become meek due to grief, the way you look, the supernatural form of yours and the way you are dressed like an ascetic, you certainly appear to be the queen of Lord Rama.’॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)