| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 5: सुन्दर काण्ड » सर्ग 32: सीताजी का तर्क-वितर्क » श्लोक 7 |
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| | | | श्लोक 5.32.7  | सा वीक्षमाणा पृथुभुग्नवक्त्रं
शाखामृगेन्द्रस्य यथोक्तकारम्।
ददर्श पिंगप्रवरं महार्हं
वातात्मजं बुद्धिमतां वरिष्ठम्॥ ७॥ | | | | | | अनुवाद | | वहाँ देखकर उन्होंने विशाल और टेढ़े मुख वाले हनुमानजी को देखा, जो परम आदरणीय, बुद्धिमानों में श्रेष्ठ, वानर-प्रेमी पवनपुत्र, वानरराज सुग्रीव के आज्ञाकारी थे॥7॥ | | | | Looking there, he saw the huge and crooked faced Hanumanji, the most respectable, the best among the wise, the monkey-loving son of the wind, obedient to the monkey king Sugriva. 7॥ | | ✨ ai-generated | | |
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