श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 31: हनुमान जी का सीता को सुनाने के लिये श्रीराम-कथा का वर्णन करना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.31.2 
राजा दशरथो नाम रथकुञ्जरवाजिमान्।
पुण्यशीलो महाकीर्तिरिक्ष्वाकूणां महायशा:॥ २॥
 
 
अनुवाद
इक्ष्वाकु वंश में राजा दशरथ नामक एक प्रसिद्ध पुण्यात्मा राजा हुए हैं। वे बड़े यशस्वी और कीर्तिवान थे। उनके पास बहुत से रथ, हाथी और घोड़े थे। 2॥
 
In the Ikshvaku dynasty, a famous virtuous soul named King Dasharatha has become the king. He was very famous and very famous. They had a lot of chariots, elephants and horses. 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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