श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 31: हनुमान जी का सीता को सुनाने के लिये श्रीराम-कथा का वर्णन करना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  5.31.18 
निशम्य सीता वचनं कपेश्च
दिशश्च सर्वा: प्रदिशश्च वीक्ष्य।
स्वयं प्रहर्षं परमं जगाम
सर्वात्मना राममनुस्मरन्ती॥ १८॥
 
 
अनुवाद
वानर की बातें सुनकर सीताजी बहुत प्रसन्न हुईं और हृदय से भगवान राम का स्मरण करती हुई चारों ओर देखने लगीं॥18॥
 
Sita was very pleased to hear the words of the monkey. She started looking in all directions, remembering Lord Rama with all her heart.॥ 18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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