श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 31: हनुमान जी का सीता को सुनाने के लिये श्रीराम-कथा का वर्णन करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.31.10 
जनस्थानवधं श्रुत्वा निहतौ खरदूषणौ।
ततस्त्वमर्षापहृता जानकी रावणेन तु॥ १०॥
 
 
अनुवाद
जनस्थान के विनाश तथा उनके द्वारा खर-दूषण के वध का समाचार सुनकर रावण ने क्रोधवश जनकनन्दिनी सीता का हरण कर लिया।
 
Hearing the news of the destruction of Janasthan and the killing of Khar-Dushana by them, Ravana, out of anger, abducted Janakanandini Sita.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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