श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 31: हनुमान जी का सीता को सुनाने के लिये श्रीराम-कथा का वर्णन करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.31.1 
एवं बहुविधां चिन्तां चिन्तयित्वा महामति:।
संश्रवे मधुरं वाक्यं वैदेह्या व्याजहार ह॥ १॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार बहुत सी बातें सोचकर बुद्धिमान हनुमान्‌जी ने मधुर वाणी में सीता से कहना आरम्भ किया:॥1॥
 
Having pondered over many things in this manner, the wise Hanuman began narrating to Sita in a sweet voice: ॥1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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