Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 5.30.8: वह दुःख के कारण अचेत हो गई है। यदि मैं इस पतिव्रता सीता को सांत्वना दिए बिना चला जाऊँ, तो मेरा वहाँ जाना पाप होगा।'   |   ramayan सर्ग 5.30: सीताजी से वार्तालाप करने के विषय में हनुमान जी का विचार करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 30: सीताजी से वार्तालाप करने के विषय में हनुमान जी का विचार करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  5.30.8 
यदि ह्यहं सतीमेनां शोकोपहतचेतनाम्।
अनाश्वास्य गमिष्यामि दोषवद् गमनं भवेत्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
वह दुःख के कारण अचेत हो गई है। यदि मैं इस पतिव्रता सीता को सांत्वना दिए बिना चला जाऊँ, तो मेरा वहाँ जाना पाप होगा।'
 
She has become unconscious due to grief. If I go away without consoling this virtuous and faithful Sita, then my going there would be a sin.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)