श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 30: सीताजी से वार्तालाप करने के विषय में हनुमान जी का विचार करना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.30.7 
अहमाश्वासयाम्येनां पूर्णचन्द्रनिभाननाम्।
अदृष्टदु:खां दु:खस्य न ह्यन्तमधिगच्छतीम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
उसका चेहरा पूर्णिमा के चाँद जैसा सुंदर है। उसने पहले कभी ऐसा दुःख नहीं देखा, लेकिन इस समय वह दुःख से उबर नहीं पा रही है। इसलिए मैं उसे दिलासा दूँगा।
 
‘Her face is as beautiful as the full moon. She has never experienced such sorrow before, but at this time she is unable to overcome the sorrow. So I will give her reassurance.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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