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श्लोक 5.30.43  |
श्रावयिष्यामि सर्वाणि मधुरां प्रब्रुवन् गिरम्।
श्रद्धास्यति यथा सीता तथा सर्वं समादधे॥ ४३॥ |
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| अनुवाद |
| मैं श्री राम के सब सन्देश मधुर वाणी में कहूँगा, जिससे सीता को उनके वचनों पर विश्वास हो जाए। जिस प्रकार उनके मन का संशय दूर हो गया है, उसी प्रकार मैं सब बातों का समाधान करूँगा।॥ 43॥ |
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| I will tell all the messages of Shri Ram in a sweet voice so that Sita believes in his words. Just as the doubts in her mind are dispelled, I will resolve all matters in the same way.'॥ 43॥ |
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