श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 30: सीताजी से वार्तालाप करने के विषय में हनुमान जी का विचार करना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.30.3 
यां कपीनां सहस्राणि सुबहून्ययुतानि च।
दिक्षु सर्वासु मार्गन्ते सेयमासादिता मया॥ ३॥
 
 
अनुवाद
आज मुझे वह सीता मिल गई है, जिसे करोड़ों वानर सब दिशाओं में खोज रहे हैं॥3॥
 
Today I have found Sita, whom millions of monkeys are searching for in all directions.॥ 3॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas