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ramayan 5.30.18: लेकिन ऐसा करने में एक बाधा है। अगर मैं ब्राह्मण की तरह संस्कृत बोलूंगा, तो सीता मुझे रावण समझ लेंगी और डर जाएंगी।   |   ramayan सर्ग 5.30: सीताजी से वार्तालाप करने के विषय में हनुमान जी का विचार करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 30: सीताजी से वार्तालाप करने के विषय में हनुमान जी का विचार करना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  5.30.18 
यदि वाचं प्रदास्यामि द्विजातिरिव संस्कृताम्।
रावणं मन्यमाना मां सीता भीता भविष्यति॥ १८॥
 
 
अनुवाद
लेकिन ऐसा करने में एक बाधा है। अगर मैं ब्राह्मण की तरह संस्कृत बोलूंगा, तो सीता मुझे रावण समझ लेंगी और डर जाएंगी।
 
But there is one obstacle in doing so. If I speak Sanskrit like a Brahmin, Sita will mistake me for Ravana and get frightened.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)