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ramayan 5.30.11: परंतु राक्षसों के सामने उनसे बात करना मेरे लिए उचित नहीं होगा। ऐसी स्थिति में मेरे लिए सबसे बड़ी कठिनाई यह निर्णय करना है कि इस कार्य को किस प्रकार पूरा किया जाए॥ 11॥   |   ramayan सर्ग 5.30: सीताजी से वार्तालाप करने के विषय में हनुमान जी का विचार करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 30: सीताजी से वार्तालाप करने के विषय में हनुमान जी का विचार करना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  5.30.11 
निशाचरीणां प्रत्यक्षमक्षमं चाभिभाषितम्।
कथं नु खलु कर्तव्यमिदं कृच्छ्रगतो ह्यहम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
परंतु राक्षसों के सामने उनसे बात करना मेरे लिए उचित नहीं होगा। ऐसी स्थिति में मेरे लिए सबसे बड़ी कठिनाई यह निर्णय करना है कि इस कार्य को किस प्रकार पूरा किया जाए॥ 11॥
 
But it will not be right for me to talk to them in front of the demons. In such a situation, the biggest difficulty for me is to decide how to complete this task.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)