श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 30: सीताजी से वार्तालाप करने के विषय में हनुमान जी का विचार करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.30.10 
यथा च स महाबाहु: पूर्णचन्द्रनिभानन:।
समाश्वासयितुं न्याय्य: सीतादर्शनलालस:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
पूर्ण चन्द्रमा के समान मनोहर मुख वाले महाबाहु श्री राम भी सीता के दर्शन के लिए उत्सुक हैं। जिस प्रकार सीता का संदेश उन्हें पहुँचाकर उन्हें सान्त्वना देना उचित है, उसी प्रकार सीता का संदेश उन्हें पहुँचाकर उन्हें आश्वस्त करना भी उचित होगा॥10॥
 
‘The mighty-armed Shri Ram, with a face as charming as the full moon, is also eager to see Sita. Just as it is appropriate to convey Sita's message and console him, similarly it would be appropriate to convey Sita's message and assure her.॥10॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas