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ramayan 5.3.7-8h: उस नगरी के निकट पहुँचकर हनुमान जी हर्ष और उत्साह से भरकर अचानक उछलकर उसकी प्राचीर पर चढ़ गए। वहाँ लंकापुरी को चारों ओर से देखकर हनुमान जी का मन आश्चर्य से चकित हो गया।   |   ramayan सर्ग 5.3: लंकापुरी का अवलोकन करके हनुमान् जी का विस्मित होना, निशाचरी लंका का उन्हें रोकना और उनकी मार से विह्वल होकर प्रवेश की अनुमति देना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 3: लंकापुरी का अवलोकन करके हनुमान् जी का विस्मित होना, निशाचरी लंका का उन्हें रोकना और उनकी मार से विह्वल होकर प्रवेश की अनुमति देना  »  श्लोक 7-8h
 
 
श्लोक  5.3.7-8h 
आसाद्य सहसा हृष्ट: प्राकारमभिपेदिवान्॥ ७॥
विस्मयाविष्टहृदय: पुरीमालोक्य सर्वत:।
 
 
अनुवाद
उस नगरी के निकट पहुँचकर हनुमान जी हर्ष और उत्साह से भरकर अचानक उछलकर उसकी प्राचीर पर चढ़ गए। वहाँ लंकापुरी को चारों ओर से देखकर हनुमान जी का मन आश्चर्य से चकित हो गया।
 
Reaching near that city, Hanuman ji, filled with joy and enthusiasm, suddenly jumped and climbed its ramparts. There, after observing Lankapuri from all sides, Hanuman ji's mind was astonished with wonder. 7 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)