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ramayan 5.3.48: सौम्य! आज तुम्हारे दर्शन पाकर वह क्षण मेरे सामने आ गया है। ब्रह्माजी ने जो भी सत्य निश्चित कर दिया है, उसमें कोई परिवर्तन नहीं हो सकता। 48।   |   ramayan सर्ग 5.3: लंकापुरी का अवलोकन करके हनुमान् जी का विस्मित होना, निशाचरी लंका का उन्हें रोकना और उनकी मार से विह्वल होकर प्रवेश की अनुमति देना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 3: लंकापुरी का अवलोकन करके हनुमान् जी का विस्मित होना, निशाचरी लंका का उन्हें रोकना और उनकी मार से विह्वल होकर प्रवेश की अनुमति देना  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  5.3.48 
स हि मे समय: सौम्य प्राप्तोऽद्य तव दर्शनात्।
स्वयम्भूविहित: सत्यो न तस्यास्ति व्यतिक्रम:॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
सौम्य! आज तुम्हारे दर्शन पाकर वह क्षण मेरे सामने आ गया है। ब्रह्माजी ने जो भी सत्य निश्चित कर दिया है, उसमें कोई परिवर्तन नहीं हो सकता। 48।
 
‘Soumya! Today, after seeing you, that moment has come before me. Whatever truth Brahmaji has decided, there can be no change in it. 48.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)