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ramayan 5.3.43: उधर लंकावासी अत्यन्त व्याकुल होकर उस वानर योद्धा हनुमान् से गर्वयुक्त वाणी में इस प्रकार बोले -॥43॥   |   ramayan सर्ग 5.3: लंकापुरी का अवलोकन करके हनुमान् जी का विस्मित होना, निशाचरी लंका का उन्हें रोकना और उनकी मार से विह्वल होकर प्रवेश की अनुमति देना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 3: लंकापुरी का अवलोकन करके हनुमान् जी का विस्मित होना, निशाचरी लंका का उन्हें रोकना और उनकी मार से विह्वल होकर प्रवेश की अनुमति देना  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  5.3.43 
ततो वै भृशमुद्विग्ना लंका सा गद‍्गदाक्षरम्।
उवाचागर्वितं वाक्यं हनुमन्तं प्लवङ्गमम्॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
उधर लंकावासी अत्यन्त व्याकुल होकर उस वानर योद्धा हनुमान् से गर्वयुक्त वाणी में इस प्रकार बोले -॥43॥
 
On the other hand, Lanka became very upset and spoke to that monkey warrior Hanuman in a proud voice as follows -॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)