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ramayan 5.3.42: जिस लंका को स्वयं उन्होंने ही नष्ट किया था, उसे स्त्री समझकर महाबली हनुमान को उस पर दया आ गई और उन्होंने उस पर बड़ी दया की।   |   ramayan सर्ग 5.3: लंकापुरी का अवलोकन करके हनुमान् जी का विस्मित होना, निशाचरी लंका का उन्हें रोकना और उनकी मार से विह्वल होकर प्रवेश की अनुमति देना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 3: लंकापुरी का अवलोकन करके हनुमान् जी का विस्मित होना, निशाचरी लंका का उन्हें रोकना और उनकी मार से विह्वल होकर प्रवेश की अनुमति देना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  5.3.42 
ततस्तु हनुमान् वीरस्तां दृष्ट्वा विनिपातिताम्।
कृपां चकार तेजस्वी मन्यमान: स्त्रियं च ताम्॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
जिस लंका को स्वयं उन्होंने ही नष्ट किया था, उसे स्त्री समझकर महाबली हनुमान को उस पर दया आ गई और उन्होंने उस पर बड़ी दया की।
 
Seeing the Lanka that he himself had destroyed and considering it to be a woman, the illustrious warrior Hanuman felt pity for it. He showed great kindness to it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)