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ramayan 5.3.40: फिर उसने अपने बाएँ हाथ की उँगलियाँ मोड़कर मुट्ठी बाँधी और बड़े क्रोध से लंका पर घूँसा मारा ॥40॥   |   ramayan सर्ग 5.3: लंकापुरी का अवलोकन करके हनुमान् जी का विस्मित होना, निशाचरी लंका का उन्हें रोकना और उनकी मार से विह्वल होकर प्रवेश की अनुमति देना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 3: लंकापुरी का अवलोकन करके हनुमान् जी का विस्मित होना, निशाचरी लंका का उन्हें रोकना और उनकी मार से विह्वल होकर प्रवेश की अनुमति देना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  5.3.40 
तत: संवर्तयामास वामहस्तस्य सोऽङ्गुली:।
मुष्टिनाभिजघानैनां हनुमान् क्रोधर्मूच्छित:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
फिर उसने अपने बाएँ हाथ की उँगलियाँ मोड़कर मुट्ठी बाँधी और बड़े क्रोध से लंका पर घूँसा मारा ॥40॥
 
Then he folded the fingers of his left hand and made a fist and in great anger he punched Lanka. ॥ 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)