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ramayan 5.3.38: यह सुनकर लंकावासी भयंकर गर्जना करने लगे और वानरों में श्रेष्ठ हनुमान्‌जी को बहुत जोर से थप्पड़ मारा ॥38॥   |   ramayan सर्ग 5.3: लंकापुरी का अवलोकन करके हनुमान् जी का विस्मित होना, निशाचरी लंका का उन्हें रोकना और उनकी मार से विह्वल होकर प्रवेश की अनुमति देना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 3: लंकापुरी का अवलोकन करके हनुमान् जी का विस्मित होना, निशाचरी लंका का उन्हें रोकना और उनकी मार से विह्वल होकर प्रवेश की अनुमति देना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  5.3.38 
तत: कृत्वा महानादं सा वै लंका भयंकरम्।
तलेन वानरश्रेष्ठं ताडयामास वेगिता॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर लंकावासी भयंकर गर्जना करने लगे और वानरों में श्रेष्ठ हनुमान्‌जी को बहुत जोर से थप्पड़ मारा ॥38॥
 
On hearing this, Lanka roared terribly and slapped the best of the monkeys, Hanuman, very hard. ॥ 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)