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ramayan 5.3.37: तब वानरों के उस सरदार ने रात्रिचारिणी से कहा - 'भली ! इस नगर को देखकर मैं जिस मार्ग से आया हूँ, उसी मार्ग से लौट जाऊँगा।'   |   ramayan सर्ग 5.3: लंकापुरी का अवलोकन करके हनुमान् जी का विस्मित होना, निशाचरी लंका का उन्हें रोकना और उनकी मार से विह्वल होकर प्रवेश की अनुमति देना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 3: लंकापुरी का अवलोकन करके हनुमान् जी का विस्मित होना, निशाचरी लंका का उन्हें रोकना और उनकी मार से विह्वल होकर प्रवेश की अनुमति देना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  5.3.37 
तत: स हरिशार्दूलस्तामुवाच निशाचरीम्।
दृष्ट्वा पुरीमिमां भद्रे पुनर्यास्ये यथागतम्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
तब वानरों के उस सरदार ने रात्रिचारिणी से कहा - 'भली ! इस नगर को देखकर मैं जिस मार्ग से आया हूँ, उसी मार्ग से लौट जाऊँगा।'
 
Then that chief of the monkeys said to the night-woman - 'Good lady! After seeing this city, I will return the same way I came.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)