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ramayan 5.3.34: मैं यहाँ केवल वन, उपवन, वन और लंका के मुख्य भवनों को देखने के लिए आया हूँ।’ ॥34॥   |   ramayan सर्ग 5.3: लंकापुरी का अवलोकन करके हनुमान् जी का विस्मित होना, निशाचरी लंका का उन्हें रोकना और उनकी मार से विह्वल होकर प्रवेश की अनुमति देना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 3: लंकापुरी का अवलोकन करके हनुमान् जी का विस्मित होना, निशाचरी लंका का उन्हें रोकना और उनकी मार से विह्वल होकर प्रवेश की अनुमति देना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  5.3.34 
वनान्युपवनानीह लंकाया: काननानि च।
सर्वतो गृहमुख्यानि द्रष्टुमागमनं हि मे॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
मैं यहाँ केवल वन, उपवन, वन और लंका के मुख्य भवनों को देखने के लिए आया हूँ।’ ॥34॥
 
I have come here only to see the forests, groves, woods and the main buildings of Lanka.' ॥ 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)