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ramayan 5.3.28: मैं महाबली राक्षसराज रावण की दासी हूँ और उसकी आज्ञा का पालन करती हूँ। मुझ पर आक्रमण करना किसी के लिए भी कठिन है। मैं इस नगर की रक्षा करती हूँ॥ 28॥   |   ramayan सर्ग 5.3: लंकापुरी का अवलोकन करके हनुमान् जी का विस्मित होना, निशाचरी लंका का उन्हें रोकना और उनकी मार से विह्वल होकर प्रवेश की अनुमति देना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 3: लंकापुरी का अवलोकन करके हनुमान् जी का विस्मित होना, निशाचरी लंका का उन्हें रोकना और उनकी मार से विह्वल होकर प्रवेश की अनुमति देना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  5.3.28 
अहं राक्षसराजस्य रावणस्य महात्मन:।
आज्ञाप्रतीक्षा दुर्धर्षा रक्षामि नगरीमिमाम्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
मैं महाबली राक्षसराज रावण की दासी हूँ और उसकी आज्ञा का पालन करती हूँ। मुझ पर आक्रमण करना किसी के लिए भी कठिन है। मैं इस नगर की रक्षा करती हूँ॥ 28॥
 
I am the maidservant of the great demon king Ravana who awaits his orders. It is very difficult for anyone to attack me. I protect this city.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)