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ramayan 5.3.21: वानरश्रेष्ठ हनुमान को देखते ही रावण की लंका अपने आप उठ खड़ी हुई। उसका मुख अत्यंत भयानक था।   |   ramayan सर्ग 5.3: लंकापुरी का अवलोकन करके हनुमान् जी का विस्मित होना, निशाचरी लंका का उन्हें रोकना और उनकी मार से विह्वल होकर प्रवेश की अनुमति देना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 3: लंकापुरी का अवलोकन करके हनुमान् जी का विस्मित होना, निशाचरी लंका का उन्हें रोकना और उनकी मार से विह्वल होकर प्रवेश की अनुमति देना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  5.3.21 
सा तं हरिवरं दृष्ट्वा लंका रावणपालिता।
स्वयमेवोत्थिता तत्र विकृताननदर्शना॥ २१॥
 
 
अनुवाद
वानरश्रेष्ठ हनुमान को देखते ही रावण की लंका अपने आप उठ खड़ी हुई। उसका मुख अत्यंत भयानक था।
 
On seeing Hanuman, the best of the monkeys, Lanka ruled by Ravana stood up on its own. Its face was very terrifying to look at.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)