Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.3.1-2: महामेघों के समान ऊँचे शिखर वाले त्रिकूट पर्वत पर, बुद्धिमान, पराक्रमी और कपिश्रेष्ठ हनुमानजी ने सत्त्वगुण का आश्रय लेकर रात्रि के समय रावण द्वारा शासित लंकापुरी में प्रवेश किया। वह नगरी मनोरम वनों और जलाशयों से सुशोभित थी। 1-2॥ | ramayan सर्ग 5.3: लंकापुरी का अवलोकन करके हनुमान् जी का विस्मित होना, निशाचरी लंका का उन्हें रोकना और उनकी मार से विह्वल होकर प्रवेश की अनुमति देना । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
महामेघों के समान ऊँचे शिखर वाले त्रिकूट पर्वत पर, बुद्धिमान, पराक्रमी और कपिश्रेष्ठ हनुमानजी ने सत्त्वगुण का आश्रय लेकर रात्रि के समय रावण द्वारा शासित लंकापुरी में प्रवेश किया। वह नगरी मनोरम वनों और जलाशयों से सुशोभित थी। 1-2॥
On the high peaked Lamb (Trikuta) mountain which looked like a cloud of great clouds, Hanuman, the intelligent, powerful and best of the Kapi, took the shelter of Sattva Guna and entered Lankapuri ruled by Ravana at night. That city was adorned with picturesque forests and reservoirs. 1-2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥