| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 5: सुन्दर काण्ड » सर्ग 28: विलाप करती हुई सीता का प्राण त्याग के लिये उद्यत होना » श्लोक 8 |
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| | | | श्लोक 5.28.8  | हा राम हा लक्ष्मण हा सुमित्रे
हा राममात: सह मे जनन्य:।
एषा विपद्याम्यहमल्पभाग्या
महार्णवे नौरिव मूढवाता॥ ८॥ | | | | | | अनुवाद | | हे राम! हे लक्ष्मण! हे सुमित्रा! हे श्रीराम की माता, कौशल्या! और हे मेरी माताओं! जैसे तूफान में फँसी हुई नाव समुद्र में डूब जाती है, वैसे ही आज मैं अभागिनी सीता अपने प्राणों के संकट में पड़ी हूँ। | | | | Oh Rama! Oh Lakshmana! Oh Sumitra! Oh mother of Sri Rama, Kausalye! And yes my mothers! Just as a boat caught in a storm sinks in the ocean, in the same way today I, unfortunate Sita, am lying in a state of danger to my life. | | ✨ ai-generated | | |
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