श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 28: विलाप करती हुई सीता का प्राण त्याग के लिये उद्यत होना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  5.28.17 
शोकाभितप्ता बहुधा विचिन्त्य
सीताथ वेणीग्रथनं गृहीत्वा।
उद‍्बद‍्ध्य वेण्युद्‍ग्रथनेन शीघ्र-
महं गमिष्यामि यमस्य मूलम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
सीता ने दुःख से अभिभूत होकर बहुत विचार-विमर्श के बाद अपनी चोटी पकड़ी और निश्चय किया कि वह शीघ्र ही अपनी चोटी से फांसी लगाकर यमलोक चली जाएंगी।
 
Sita, overcome with grief, after much deliberation, held her braid and decided that she would soon hang herself with her braid and go to Yamaloka.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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