श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 28: विलाप करती हुई सीता का प्राण त्याग के लिये उद्यत होना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  5.28.16 
संजीवितं क्षिप्रमहं त्यजेयं
विषेण शस्त्रेण शितेन वापि।
विषस्य दाता न तु मेऽस्ति कश्चि-
च्छस्त्रस्य वा वेश्मनि राक्षसस्य॥ १६॥
 
 
अनुवाद
मैं किसी तीक्ष्ण शस्त्र या विष द्वारा प्राण त्याग देना चाहता हूँ; परन्तु इस राक्षस के पास मुझे न तो विष देने वाला है और न ही शस्त्र देने वाला।॥16॥
 
I would sooner give up my life by some sharp weapon or poison; but this demon has no one to give me either poison or weapon.'॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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