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श्लोक 5.28.16  |
संजीवितं क्षिप्रमहं त्यजेयं
विषेण शस्त्रेण शितेन वापि।
विषस्य दाता न तु मेऽस्ति कश्चि-
च्छस्त्रस्य वा वेश्मनि राक्षसस्य॥ १६॥ |
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| अनुवाद |
| मैं किसी तीक्ष्ण शस्त्र या विष द्वारा प्राण त्याग देना चाहता हूँ; परन्तु इस राक्षस के पास मुझे न तो विष देने वाला है और न ही शस्त्र देने वाला।॥16॥ |
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| I would sooner give up my life by some sharp weapon or poison; but this demon has no one to give me either poison or weapon.'॥ 16॥ |
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