श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 27: त्रिजटा का स्वप्न, राक्षसों के विनाश और श्रीरघुनाथजी की विजय की शुभ सूचना  »  श्लोक 8-9h
 
 
श्लोक  5.27.8-9h 
कथयस्व त्वया दृष्ट: स्वप्नोऽयं कीदृशो निशि।
तासां श्रुत्वा तु वचनं राक्षसीनां मुखोद‍्गतम्॥ ८॥
उवाच वचनं काले त्रिजटा स्वप्नसंश्रितम्।
 
 
अनुवाद
"अरे! बताओ, आज रात तुमने कैसा स्वप्न देखा है?" उन राक्षसियों के मुख से यह वचन सुनकर त्रिजटा ने उस स्वप्न का इस प्रकार वर्णन किया - ॥8 1/2॥
 
"Hey! Tell me, what kind of dream have you seen tonight?" Hearing these words from the mouth of those demonesses, Trijata then described the dream thus - ॥ 8 1/2 ॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)