श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 27: त्रिजटा का स्वप्न, राक्षसों के विनाश और श्रीरघुनाथजी की विजय की शुभ सूचना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  5.27.41 
अपगच्छत पश्यध्वं सीतामाप्नोति राघव:।
घातयेत् परमामर्षी युष्मान् सार्धं हि राक्षसै:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
'अतः अब तुम सब लोग हटकर देखो कि श्री रघुनाथजी किस प्रकार सीता को प्राप्त कर रहे हैं। वे अत्यन्त क्रोधित हैं, वे राक्षसों सहित तुम सबको भी मरवा डालेंगे॥ 41॥
 
‘So now you all move aside and see how Shri Raghunathji is getting Sita. He is very angry, he will get you all killed along with the demons.॥ 41॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd