श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 26: सीता का करुण-विलाप तथा अपने प्राणों को त्याग देने का निश्चय करना  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  5.26.45 
अथवा राक्षसेन्द्रेण रावणेन दुरात्मना।
छद्मना घातितौ शूरौ भ्रातरौ रामलक्ष्मणौ॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
अथवा दुष्ट राक्षसराज रावण ने छल से उन दोनों वीर भाइयों श्री राम और लक्ष्मण को मार डाला है ॥45॥
 
Or the evil demon king Ravana has killed those two brave brothers Shri Ram and Lakshman by deceit. 45॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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