श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 26: सीता का करुण-विलाप तथा अपने प्राणों को त्याग देने का निश्चय करना  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  5.26.44 
अथवा न्यस्तशस्त्रौ तौ वने मूलफलाशनौ।
भ्रातरौ हि नरश्रेष्ठौ चरन्तौ वनगोचरौ॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
अथवा वे दोनों वनवासी भाई, पुरुषोत्तम श्री राम और लक्ष्मण, जो पहले वन में फल-सब्जियाँ खाते हुए विचरण करते थे, अब उन्होंने अहिंसा व्रत धारण कर लिया है और अपने शस्त्र त्याग दिए हैं॥44॥
 
Or those two forest dweller brothers, the best of men, Shri Ram and Lakshman, who used to wander in the forest eating fruits and vegetables, have now taken a vow of non-violence and have given up their weapons. 44॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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