श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 26: सीता का करुण-विलाप तथा अपने प्राणों को त्याग देने का निश्चय करना  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  5.26.43 
श्रेयो मे जीवितान्मर्तुं विहीनाया महात्मना।
रामादक्लिष्टचारित्राच्छूराच्छत्रुनिबर्हणात्॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
मेरे पति भगवान श्री राम का सतीत्व अक्षुण्ण है। वे वीर योद्धा हैं और अपने शत्रुओं का संहार करने में समर्थ हैं। मैं उनकी रक्षा की पात्र हूँ, किन्तु मैं उन महात्मा से विमुख हूँ। ऐसी स्थिति में मेरे लिए जीने की अपेक्षा मरना ही श्रेष्ठ है॥ 43॥
 
‘The virtue of my husband Lord Shri Ram is intact. He is a valiant warrior and is capable of killing his enemies. I am worthy of his protection, but I am separated from that great soul. In such a condition, it is better for me to die than to live.॥ 43॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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