श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 26: सीता का करुण-विलाप तथा अपने प्राणों को त्याग देने का निश्चय करना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  5.26.39 
धन्या देवा: सगन्धर्वा: सिद्धाश्च परमर्षय:।
मम पश्यन्ति ये वीरं रामं राजीवलोचनम्॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
वे देवता, गन्धर्व, सिद्ध और महर्षि धन्य हैं, जो मेरे पति, पराक्रमी और कमलनेत्र वाले श्री रामजी का दर्शन कर पाते हैं॥ 39॥
 
‘Blessed are the Gods, Gandharvas, Siddhas and Maharishis who are able to have the darshan of my husband, the bravest of all and lotus-eyed Shri Ram.॥ 39॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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