श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 26: सीता का करुण-विलाप तथा अपने प्राणों को त्याग देने का निश्चय करना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  5.26.37 
नाजानाज्जीवतीं राम: स मां भरतपूर्वज:।
जानन्तौ तु न कुर्यातां नोर्व्यां हि परिमार्गणम्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
भरत के बड़े भाई भगवान श्री राम को यह नहीं मालूम कि मैं जीवित हूँ। यदि उन्हें यह मालूम होता, तो यह संभव नहीं होता कि वे पृथ्वी पर मेरी खोज न करते। 37.
 
‘Bharat's elder brother Lord Shri Ram does not know that I am alive. Had he known this, it would not have been possible that he would not have searched for me on earth. 37.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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