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श्लोक 5.26.33  |
स च मे विहितो मृत्युरस्मिन् दुष्टेन वर्तते।
अकार्यं ये न जानन्ति नैर्ऋता: पापकारिण:॥ ३३॥ |
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| अनुवाद |
| उसी समय दुष्ट रावण ने मुझे मारने का निश्चय कर लिया है। ये पापी राक्षस यह भी नहीं जानते कि क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए॥ 33॥ |
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| ‘At that very moment the evil Ravana has decided to kill me. These sinful demons do not even know what should be done and what should not be done.॥ 33॥ |
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