श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 26: सीता का करुण-विलाप तथा अपने प्राणों को त्याग देने का निश्चय करना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  5.26.30 
सान्धकारा हतद्योता हतराक्षसपुंगवा।
भविष्यति पुरी लङ्का निर्दग्धा रामसायकै:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
श्री रामचन्द्रजी के बाणों से दग्ध होकर लंकापुरी का वैभव नष्ट हो जाएगा। उसमें अंधकार छा जाएगा और यहाँ के सभी प्रमुख राक्षस मृत्यु के मुख में चले जाएँगे॥30॥
 
‘The glory of Lankapuri will be destroyed due to being burnt by the arrows of Shri Ramachandraji. Darkness will engulf it and all the prominent demons here will go to the jaws of death.॥ 30॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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