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श्लोक 5.26.28  |
पुण्योत्सवसमृद्धा च नष्टभर्त्री सराक्षसा।
भविष्यति पुरी लङ्का नष्टभर्त्री यथांगना॥ २८॥ |
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| अनुवाद |
| जिस लंका में आज पुण्य उत्सव हो रहे हैं, वह राक्षसों सहित अपने स्वामी के नष्ट हो जाने पर विधवा के समान दरिद्र हो जाएगी॥ 28॥ |
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| The Lanka where holy festivals are being held today will become destitute like a widow after the destruction of its lord along with the demons.॥ 28॥ |
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